IAS Exam 2015
सिविल सेवा परीक्षाः 2014 की प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण
वर्ष 2014 के प्रश्न पत्र ने पिछले ट्रेंड्स को दरकिनार करते हुए एक नया पैटर्न स्थापित करने की कोशिश की। पहले और दूसरे प्रश्नपत्र ने परीक्षार्थियों को चैंकाने में सफलता हासिल की। कुछ नये काॅम्बीनेशन और विषयों पर आधारित प्रश्नों से अभ्यर्थियों की कड़ी परीक्षा ली।
सिविल सेवा परीक्षा पिछले वर्ष का पेपर कई मामलों में महत्वपूर्ण रहा। वर्ष 2014 के प्रश्न पत्र ने पिछले ट्रेंड्स को दरकिनार करते हुए एक नया पैटर्न स्थापित करने की कोशिश की। पहले और दूसरे प्रश्नपत्र ने परीक्षार्थियों को चैंकाने में सफलता हासिल की। यूपीएससी ने भी सभी अनुमानों को किनारा करते हुए निर्धारित सिलेबस में से कुछ नये काॅम्बीनेशन और विषयों पर आधारित प्रश्नों से अभ्यर्थियों की कड़ी परीक्षा ली। लीक पर चलकर तैयारी करने वाले लोगों को निराशा हाथ लगी और खुले दिमाग से स्ट्रेटजी तय करने वालों को सफलता हाथ लगी। आने वाली प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी के लिए इस प्रश्न पत्र का वृहद विश्लेषण करना जरूरी है ताकि लास्ट टाइम स्ट्रेटजी डिसाइड करने में परीक्षार्थियों को आसानी हो।
प्रथम प्रश्न पत्र
इस प्रश्न पत्र का विश्लेषण करने से पहले इसके प्रश्नों को विषयवार बांट देना ठीक रहेगा। इससे यह समझने में आसानी रहेगी कि किस विषय पर ज्यादा जोर रखना ठीक होगा। इसके बाद सवालों की प्रकृति और पूछे जाने के तरीके पर ध्यान देना होगा ताकि उन्हें हल करने के लिए एक निश्चित स्ट्रेटजी बनाई जा सके।
सारणी को देखे तो पता चलता है कि अब तक सामयिक विषयों पर जोर देने की स्ट्रेटजी इस बार काम नहीं आई और इतिहास तथा संस्कृति से सबसे ज्यादा प्रश्न पूछे गए। अगर संस्कृति के 12 प्रश्नों को हटा भी दिया जाए तो इतिहास में से 8 सवाल पूछे गए हैं। इतिहास में से भी आधे प्रश्न आधुनिक भारत के हिसे में आए हैं और प्राचीन तथा मध्यकालीन भारत के हिस्से में एक-एक सवाल आया है। विज्ञान में सबसे ज्यादा प्रश्न जीव विज्ञान में से पूछे गए हैं। जीव विज्ञान से आने वाले प्रश्नों की संख्या 11 रही। भौतिक विज्ञान की श्रेणी में 2 प्रश्न रखे जा सकते हैं लेकिन उन्हें समसामयिक की श्रेणी में भी रखा जा सकता है। इसी तरह भारतीय संविधान पर आधारित 7 प्रश्न पूछे गए जो पूरी तरह अनुच्छेदों को याद रखने की क्षमता पर ही हल किए जा सकते हैं तो बाकि 7 प्रश्न प्रक्रियागत विषयों पर पूछे गए जो अभ्यर्थी की विश्लेषणात्मक क्षमता को परखते हैं। भूगोल में से ज्यादातर प्रश्न भारत की भौगोलिक परिस्थितियों पर आधारित रहे हैं और विश्व भूगोल के खाते में एक या दो सवाल ही डाले जा सकते हैं। अर्थव्यवस्था में से पूछे गए कई प्रश्नों को विषय के साथ समसामयिक के खाते भी डाला जा सकता है। काॅन्सेप्ट आधारित सवालों में 3 प्रश्नों को रखा जा सकता है।
प्रश्नों की प्रकृति पर बात करें तो 20 से 25 प्रश्न पत्रों को आसान की श्रेणी में रखा जा सकता है जिन्हें ज्यादातर अभ्यिर्थियों ने अटेंप्ट किया। 35 से 40 प्रश्नों को सामान्य की श्रेणी में रखा जा सकता है जिनका उत्तर गंभीर अभ्यर्थी की सीमा में हैं। लगभग इतने ही प्रश्नों को मुश्किल की श्रेणी में रखा जा सकता है जो वास्तव में सफलता और असफलता के बीच अंतर पैदा करने वाले हैं। इस परीक्षा की कटआॅफ भी इसी ओर इशारा करती है।
द्वितीय प्रश्न पत्र
सीसेट को लेकर पहले से लगाए जा रहे ढेर सारे आकलनों को इस प्रश्नपत्र ने एक तरफ करते हुए, अभ्यर्थियों को लगभग नया ट्रेंड दिया। यह अपने पहले के प्रश्नपत्र से न सिर्फ ज्यादा मुश्किल था बल्कि सवाल पूछने के तरीके को भी बदल दिया गया था। अंग्रेजी को लेकर हुए विवाद के बाद सरकार के फैसले ने भी इस पेपर के पैटर्न को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीसेट प्रश्न पत्र का विश्लेषण करने के लिए इसे भी विषयवार बांट देना ठीक रहेगा।
प्रश्न पत्र को विश्लेषण करने पर सामने आता है कि निर्णय क्षमता जैसे महत्वपूर्ण टाॅपिक से कोई प्रश्न नहीं पूछा गया है। साथ ही सबसे ज्यादा देने वाली बात है कि पूछे गए प्रश्नों का डिफिकल्टी लेवल अपने पूर्ववर्ती प्रश्नपत्रों की तुलना में ज्यादा था। इस प्रश्नपत्र ने ज्यादा अंक हासिल करने की राह को मुश्किल बनाया है। परीक्षा के कटआॅफ माक्र्स भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं। देखा जाए तो इस साल 2013 की ही तरह पैसेज की संख्या 8 ही रही लेकिन उनका टेक्सट ज्यादा लंबा था और यह अभ्यर्थी का ज्यादा समय और ऊर्जा ले रहे थे। संख्यात्मक योग्यता से पूछे गए प्रश्नों की संख्या 14 रही लेकिन सवालों में गणना को मुश्किल रखा गया जिससे अभ्यर्थियों को रफ स्पेस का ज्यादा इस्तेमाल करना पड़ा और टाइम मैनेजमेंट का ध्यान न रख पाने वाले परीक्षार्थियों को नुकसान उठाना पड़ा। तार्किक क्षमता से आए 18 सवालों में 6 को आसान की श्रेणी में रखा जा सकता है लेकिन बाकि के 12 ने सही जवाब तक पहुंचने के लिए कड़ी परीक्षा ली है। डेटा विश्लेषण से 6 सवाल पूछे गए, यहां भी दो सवालों को सामान्य की श्रेणी में रखा जा सकता है लेकिन बाकि के 4 सवालों ने समय और ऊर्जा दोनों की जरूरत रही। सीसेट के पेपर से इसी पैटर्न को बनाए रखने की उम्मीद की जा रही है। हो सकता है कि इस बार चैंकाने के लिए पेपर में निर्णय क्षमता के प्रश्नों को जगह दी जाएगी। इस वर्ष के प्रश्न पत्रों ने अभ्यर्थियों को अपना प्लाने पहले की तुलना और ज्यादा वृहद तथा संतुलित बनाने के लिए प्रेरित किया है।
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