कर्मचारी चयन आयोगः संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा 2015

कर्मचारी चयन आयोगः संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा 2015


कर्मचारी चयन आयोग इस वर्ष 9 अगस्त व 16 अगस्त को संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा के प्रथम चरण का आयोजन करने वाला है। यह परीक्षा केन्द्र सरकार के 20 संस्थानों में गु्रप बी और ग्रुप सी के लिए योग्य अभ्यर्थी खोजने की कवायद है। इस प्रतियोगी परीक्षा के द्वारा सीबीईसी, एनफोर्समेंट डिपार्टमेंट, राष्ट्रीय अन्वेषण ब्यूरो और सीएजी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ करिअॅर बनाने का मौका मिलता है। योग्य कार्मिक के तौर पर चुने जाने के लिए उम्मीदवार को तीन चरणों से गुजरना होता है। टियर 1 में बहुवैकल्पिक प्रश्नों पर आधारित 200 प्रश्न पूछे जाते हैं। दूसरे चरण में तीन प्रश्नपत्रों का सामना करना पड़ता है। तीसरा प्रश्नपत्र अभ्यर्थना के आधार पर निर्धारित होता है। तीसरे चरण में साक्षात्कार, कम्प्यूटर स्किल्स या पर्सनैलिटि टेस्ट लिया जाता है।
अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने की वजह से परीक्षा एक से अधिक पारी में आयोजित की जाती है। प्रथम चरण में आयोजित की जाने वाली परीक्षा में सामान्य अभियोग्यता, सामान्य ज्ञान, गणितीय अभियोग्यता और अंग्रेजी भाषा के प्रश्न चार खण्डों में पूछे जाते हैं। प्रत्येक खण्ड में पचास प्रश्न होते हैं। प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होता है। प्रश्न पत्र हल करने के लिए दो घंटे का समय दिया जाता है। अंको के समान वितरण की वजह से अभ्यर्थी को चारों विषयों पर समान अधिकार होना चाहिए।

सामान्य अभियोग्यता
इस खण्ड में से एनालाॅजिक्स, समानता और विभेदीकरण, कल्पनाशीलता, समस्या निर्धारण, तार्किक क्षमता, विजुअल मेमोरी, अन्वेषण, अवलोकन, सम्बन्ध निर्धारण, अंकगणितीय अभियोग्यता, आरेख एवं रेखाचित्र सम्बन्धी समस्या, संख्या पद्धति, श्रृंखला परीक्षण, कूटभाषा परीक्षण, वर्गीकरण परीक्षण, सादृश्यता परीक्षण, दिशा परीक्षण, घड़ी परीक्षण, कलैण्डर परीक्षण, वर्णमाला परीक्षण, क्रम निर्धारण परीक्षण, रिश्ता सम्बन्धी परीक्षण, स्थिति परीक्षण, पहेली परीक्षण, गणितीय परीक्षण, मैट्रिक्स परीक्षण, आरेख परीक्षण, घन परीक्षण, तार्किक परीक्षण और वेन आरेख जैसे बिन्दुओं से प्रश्न पूछे जाते हैं।
श्रृंखला परीक्षण, कूटभाषा परीक्षण, वर्गीकरण परीक्षण, सादृश्यता परीक्षण, वर्णमाला परीक्षण तथाा गणितीय परीक्षण से सबसे ज्यादा प्रश्न पूछे जाते हैं। इन सबमें अंग्रेजी वर्णमाला पर आधारित प्रश्नों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। अभ्यर्थी को प्रश्न जल्दी हल करने के लिए वर्णमाला को क्रमवार रट लेना चाहिए और परीक्षा पूर्व समय में रफ कार्य करने की जगह पर हो सके तो अंग्रेजी वर्णमाला का गणितीय क्रम में लिख लेना चाहिए। ऐसा करने से प्रश्नों को हल करने की गति तेज होने के साथ सटीक होने की संभावना भी बढ़ जाएगी। सारणी और आरेख से सम्बन्धित सवाल भी अच्छी संख्या में आते हैं इसलिए उन पर अधिकार होने की भी जरूरत है। कई अन्य बिन्दुओं जैसे मैट्रिक्स परीक्षण, घन परीक्षण, पहेली परीक्षण और घड़ी परीक्षण से अब तक कम ही प्रश्न आते रहे हैं इसलिए इन पर थोड़ा कम ध्यान भी दे तो काम चल सकता है।

सामान्य ज्ञान
प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा की तरह सामान्य ज्ञान इस परीक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है। इस खण्ड में बेहतरीन प्रतियोगी के बीच सबसे ज्यादा प्रतियोगिता होती है क्योंकि यह पूरी तरह लंबी तैयारी पर आश्रित होता है इसलिए नए प्रतियोगियों की तुलना में ज्यादा समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थी इसमें थोड़ा आगे रहते हैं इसलिए इस खण्ड की तैयारी करने के लिए हार्ड वर्क के बजाए स्मार्ट वर्क बेहतर रहता है क्योंकि सबकुछ याद कर लेना नामुमकिन हैं। इस खण्ड की तैयारी करते वक्त सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर देना होता है कि किस विषय से सबसे ज्यादा प्रश्न पूछे जाते हैं। कोई भी परीक्षा ज्यादा से ज्यादा प्रश्नों के सही उत्तर देकर ही उतीर्ण की जाती है न कि सभी प्रश्नों के  सही उत्तर देकर क्योंकि व्यवहारिक तौर पर सभी प्रश्नों के उत्तर की तैयारी करना असंभव है।
इस परीक्षा में अभ्यर्थी की वैज्ञानिक समझ को विशेषतौर पर परखा जाता है इसलिए इस विषय पर ध्यान देने की खास जरूरत है। विज्ञान के तीन खण्डों और समसामयिक विषयों को मिलाकर लगभग एक चैथाई खण्ड को कवर किया जा सकता है। इसमें अर्थशास्त्र के अलावा भूगोल और भारतीय संविधान को जोड़ दें तो आधा प्रश्नपत्र तैयार किया जा सकता है। इस तरह सिर्फ चार विषयों को ठीक तरीके से पढ़कर आधा प्रश्न पत्र सही होने की संभावना को बढ़ाया जा सकता है। अर्थशास्त्र से ज्यादातर प्रश्न भारतीय आयात-निर्यात, बजट और मौद्रिक नीति पर आधारित होते हैं। कम्प्यूटर और सूचना क्रांति से भी तीन से चार प्रश्न पूछे जाते हैं। इसी तरह विश्व के प्रमुख संगठनों, भारत के प्रमुख संस्थानों, राज्यों के नृत्य और हाल में आई पुस्तकें और लेखकों से भी प्रश्न बनते हैं।

गणितीय अभियोग्यता
यह खण्ड अभ्यर्थी की गणितीय दक्षता को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। इस खण्ड में प्रतिशतता, साधारण ब्याज, चक्रवृद्धि ब्याज, लाभ और हानि, बट्टा, शेयर एवं लाभांश, समय और काम, काम और मजदूरी, नल एवं हौज, समय और दूरी, रेलगाड़ी, धारा प्रवाह, संख्या पद्धति, भिन्न, दशमलव भिन्न, सरलीकरण, वर्ग एवं वर्गमूल, घन एवं घनमूल, अनुपात और समानुपात, साझा, औसत, आयू एवं संख्या आधारित प्रश्न, प्रमिश्रण, करणी एवं अपरिमेय संख्या, विविध बीजगणित, लघुगणक, समतल आकृति की क्षेत्रमिति, वृत की क्षेत्रमिति, ठोस पिण्ड की क्षेत्रमिति, सारणी विश्लेषण, श्रेणीक्रम और ल.स.प./म.स.प. पर अधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
गणित में प्रतिशतता, लाभ-हानि और सारणी जैस ज्यादा सवाल पूछे जाते हैं। वैसे गणित में लगभग सभी बिन्दुओं को समान वेटेज दिया जा सकता है लेकिन प्रमिश्रण, साझा और औसत जैसे बिन्दुओं को साधारण तैयार करने पर भी काम चल सकता है। इसी तरह सरलीकरण के कुछ सवाल समय ज्यादा लेते हैं ऐसे सवालों को हल किया जा सकता है लेकिन 2 घंटे में अगर 200 प्रश्न हल करने हो तो ऐसे सवालों पर ज्यादा समय खराब न करना ही ठीक रहता है।

सामान्य अंग्रेजी
इस खण्ड का नाम ही महज सामान्य अंग्रेजी है लेकिन इस खण्ड को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए आपके शब्दकोष को बेहतर बनाना होगा। यह प्रश्नपत्र पूरी तरह ग्रामर पर आधारित होता है और वही फायदे में रहता है जिसे सभी नियम याद हैं। इस खण्ड में ज्यादातर प्रश्न स्पाॅटिंग एरर, अप्रोप्रिएट वड्र्स, अल्टरनेटिव वड्र्स, अपोजिट वड्र्स, वन वर्ड, इम्प्रूव द सेन्टेन्स, करेक्टली स्पेल्ट वड्र्स, इडियम एंड फ्रेज, पैसेज, एक्टिव पैसिव और अरेंज द सैंटेन्स से पूछे जाते हैं। हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे पैसेज की तैयारी करें क्योंकि इस बिन्दु से 10 सवाल तक पूछे जाते हैं और अन्य बिन्दुओं की तुलना मंे इन प्रश्नों का जवाब ज्यादा सटीकता से दिया जा सकता है।

टाइम मैनेजमेंट पर दें ध्यान

अभ्यर्थियों को सबसे ज्यादा ध्यान प्रश्नों को हल करने की गति और समय देना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि वह समय समय पर माॅक टेस्ट द्वारा खुद को परखे। दो घंटे में 200 प्रश्न हल करने का अर्थ है कि एक प्रश्न के लिए 36 सेकण्ड का वक्त है। ऐसे में परीक्षा की योजना के हिसाब से समय को व्यवस्थित करना जरूरी है। अब तक का अनुभव यह बताता है कि गणित और रिजरिनंग सबसे ज्यादा समय लेने वाले खण्ड हैं। सामान्य ज्ञान में सबसे कम समय लगता है। अंग्रेजी भी समय लेती है। ऐसे में सबसे पहले सामान्य ज्ञान के प्रश्नों को हल करना चाहिए। इससे दबाव कम हो जाता है। गणित में ऐसे प्रश्नों को आखिर के लिए छोड़ देना ठीक होगा जिसमें लंबी गणनाएं करनी पड़ती है। छोड़े गए प्रश्नों की संख्या नोट करते चलें ताकि उन्हें बार-बार खोजने में समय बर्बाद न हो। प्रश्नों को जबानी हल करने का ज्यादा अभ्यास करें। घड़ी को हाथ में बांधने की बजाए टेबल पर ऐसी जगह रखें जहां आपकी नजर बार-बार जाए।

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